सरकारी स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का ढांचा: 11वीं में संकाय की जगह विषय समूह का विकल्प

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं और 11वीं की पढ़ाई का ढांचा बदलने की तैयारी की जा रही है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करवा रहा है। प्रस्तावित बदलाव के तहत 11वीं में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस की पारंपरिक संकाय व्यवस्था के स्थान पर विषय समूहों के आधार पर चयन का विकल्प देने की योजना है। हालांकि, नई किताबें किस शैक्षणिक सत्र से लागू होंगी, इसकी तारीख अभी तय नहीं बताई गई है।

कक्षा 9वीं में भी भाषा, कला, योग, शारीरिक शिक्षा और व्यावसायिक विषयों के विकल्प बढ़ाने की तैयारी है। इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों के संयोजन और कौशल आधारित शिक्षा के अधिक अवसर देना है।

NEP-2020 के अनुरूप तैयार होंगी नई किताबें

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करने का काम शुरू किया है। इसके लिए सबसे पहले कक्षा 9वीं और 11वीं की पुस्तकों पर काम किया जा रहा है। बोर्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने के साथ एनसीईआरटी की पुस्तकों का भी अध्ययन कर रहा है।

नई पाठ्य सामग्री में राज्य की जरूरतों और स्थानीय संदर्भों को शामिल करने की योजना है। बदलाव सिर्फ पुस्तकों की सामग्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों को विषय चुनने के अधिक विकल्प देने पर भी विचार किया जा रहा है। बोर्ड की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कक्षा 9वीं के लिए 22 तरह की और कक्षा 11वीं के लिए 73 किताबें लिखवाई जाएंगी। इन पुस्तकों को तैयार करने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में पूरी होगी।

कक्षा 9वीं में भाषा, कला और व्यावसायिक विषयों के विकल्प

प्रस्तावित व्यवस्था में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों को विषय समूहों के आधार पर विकल्प देने की तैयारी है। इसमें हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के साथ गणित, विज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान जैसे अकादमिक विषय शामिल होंगे। इसके अलावा कला शिक्षा, योग एवं शारीरिक शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा को भी विकल्पों में शामिल करने की योजना है। व्यावसायिक विषयों के उदाहरण के तौर पर अनाज उत्पादन और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है।

इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को सामान्य शैक्षणिक विषयों के साथ कौशल आधारित शिक्षा चुनने का अवसर मिल सकता है। इससे शुरुआती कक्षाओं से ही अलग-अलग रुचियों और क्षमताओं के अनुसार पढ़ाई का विकल्प तैयार करने की दिशा में काम होगा।

11वीं में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस के बजाय विषय समूह

फिलहाल कक्षा 11वीं में विद्यार्थी मुख्य रूप से साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स संकाय चुनते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में इन पारंपरिक संकायों की जगह अलग-अलग विषय समूहों से विषय चुनने का विकल्प देने की तैयारी है।

योजना के अनुसार विद्यार्थियों को एक भाषा समूह के साथ अन्य समूहों से भी विषय चुनने होंगे। इससे अलग-अलग विषयों को एक साथ पढ़ने की गुंजाइश बढ़ सकती है। उदाहरण के तौर पर विद्यार्थी अपनी रुचि और आगे की पढ़ाई की जरूरत के अनुसार विषयों का संयोजन कर सकेंगे। इस बदलाव का मकसद विद्यार्थियों को किसी एक संकाय तक सीमित रखने के बजाय विषय चयन में अधिक लचीलापन देना है। हालांकि, किन विषयों का कौन-कौन सा संयोजन उपलब्ध होगा और स्कूलों में उनकी पढ़ाई की व्यवस्था किस तरह की जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

राजस्थानी भाषा को भी शामिल करने का प्रस्ताव

कक्षा 11वीं के भाषा विकल्पों में राजस्थानी को शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं के साथ राजस्थानी को भी विकल्प के रूप में रखने का प्रस्ताव है। इस पहल का उद्देश्य राजस्थान की भाषाई जरूरतों को ध्यान में रखना है। फिलहाल इसे प्रस्ताव के रूप में ही देखा जाना चाहिए। राजस्थानी भाषा को किस रूप में और किस स्तर पर विकल्प बनाया जाएगा, इस संबंध में अंतिम निर्णय और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होना बाकी है।

नई पाठ्यपुस्तकें तैयार होने में कई चरण लगेंगे

बोर्ड के अनुसार नई किताबें तैयार करने के लिए पाठ्यक्रम निर्धारण से लेकर पांडुलिपि की समीक्षा तक की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें विषय विशेषज्ञों के साथ भाषा विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। पुस्तक तैयार करने की प्रक्रिया को इस तरह समझा जा सकता है:

  1. सबसे पहले संबंधित कक्षाओं और विषयों का पाठ्यक्रम निर्धारित किया जाएगा।
  2. विषय विशेषज्ञों से पाठ्य सामग्री लिखवाई जाएगी।
  3. भाषा और विषय विशेषज्ञ सामग्री की समीक्षा करेंगे।
  4. जरूरी संशोधनों के बाद पांडुलिपि तैयार की जाएगी।
  5. बोर्ड पांडुलिपि राज्य सरकार को भेजेगा।
  6. राज्य स्तरीय कमेटी पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करेगी।
  7. सरकार के आदेश के बाद ही नई किताबें लागू की जा सकेंगी।

इसलिए पाठ्यपुस्तकों का लेखन शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि नई किताबें तुरंत स्कूलों में लागू हो जाएंगी। पहले सभी निर्धारित चरण पूरे होंगे और उसके बाद लागू करने की तारीख तय होगी।

नई व्यवस्था कब से लागू होगी?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कक्षा 9वीं और 11वीं की नई पाठ्यपुस्तकें किस शैक्षणिक सत्र से लागू की जाएंगी। विषय समूहों की अंतिम संरचना, विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध विषयों के संयोजन और स्कूलों में उनकी उपलब्धता को लेकर भी विस्तृत जानकारी का इंतजार है। RBSE अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ के अनुसार, राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद नई किताबें तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पांडुलिपियां तैयार कर सरकार को भेजी जाएंगी। इसके बाद कमेटी उनकी समीक्षा करेगी। यह लंबी प्रक्रिया है और इस पर काम शुरू हो चुका है।

विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी बात

कक्षा 9वीं और 11वीं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों को अभी विषय चयन या संकाय बदलने को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। फिलहाल सामने आई जानकारी प्रस्तावित बदलावों और पुस्तक लेखन की प्रक्रिया से संबंधित है। अंतिम विषय सूची, प्रवेश या विषय चयन के नियम और लागू होने का सत्र घोषित होने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी।

नई व्यवस्था से विषय चुनने के विकल्प बढ़ने की संभावना है, लेकिन इसका वास्तविक स्वरूप बोर्ड और राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी तथा जारी दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा।

आधिकारिक जानकारी: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सूचनाओं और पाठ्यक्रम संबंधी अपडेट के लिए RBSE की आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें।

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